बालमुनि हंसभद्र ने बिना स्कूल जाए सारा ज्ञान अर्जित किया:राजनांदगांव में प्रखर बुद्धि देख हैरान हुए लोग; स्मरण शक्ति का किया प्रदर्शन
राजनांदगांव में 13 वर्षीय बालमुनि हंसभद्र मुनि ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति का प्रदर्शन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के पहले शतावधान प्रयोग में बिना देखे 100 वस्तुओं, व्यक्तियों या स्थानों के नाम सही-सही बताए, जिससे उपस्थित लोग आश्चर्यचकित रह गए। यह प्रयोग 2 नवंबर को चातुर्मास के दौरान जैन बगीचे के नए हॉल में आयोजित किया गया। इसमें शहर के अलग-अलग समाजों के लोगों ने भाग लिया। उन्हें 1 से 100 तक के डिस्प्ले बोर्ड पर अपनी पसंद के अनुसार व्यक्ति, महापुरुष, तीर्थ, उपकरण, पशु, पक्षी या वस्तु का नाम लिखने को कहा गया था। डिस्प्ले बोर्ड हटाए जाने के बाद, बालमुनि हंसभद्र ने श्रोताओं द्वारा पूछे गए किसी भी क्रम के प्रश्नों का तुरंत और सटीक उत्तर दिया। उदाहरण के लिए, जब उनसे 69, 55, 60, 12 और 67 नंबरों पर लिखे नामों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि 69 पर जिन कुशल सूरी जी, 55 पर अयोध्या, 60 पर सिलियारी, 12 पर ओघा और 67 पर विराग मुनि लिखा था। बालमुनि का स्मरण शक्ति देखकर हैरान हुए लोग सकल जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष मनोज बैद और चातुर्मास समिति के संयोजक प्रदीप गोलछा, रितेश लोढ़ा, दिनेश लोढ़ा, आकाश चोपड़ा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में यह पहला अवसर था जब 13 वर्षीय जैन बालमुनि द्वारा ऐसा शतावधान प्रयोग किया गया। उपस्थित जन बालमुनि की अद्भुत स्मरण शक्ति देखकर हतप्रभ रह गए। इस अवसर पर मुनि वीरभद्र (विराग) मुनि ने कहा कि लोगों को सप्ताह में कम से कम एक घंटा सही ज्ञान के लिए समर्पित करना चाहिए। उन्होंने चातुर्मास के चार माह के शीघ्र बीत जाने का भी उल्लेख किया। बिना स्कूल जाए सारा ज्ञान अर्जित किया बालमुनि ने हंसभद्र मुनि के बारे में कहा कि 4 साल पहले उज्जैन में उनके परिवार वाले उन्हें लेकर उनसे मिलने आए थे। उनकी प्रखर बुद्धि को देखकर उन्होंने उनके परिवार वालों से कहा था कि बच्चे की बुद्धि काफी तेज है और उन्हें शतावधान प्रयोग के लिए प्रेरित करें। यही उन्होंने चारित्र जीवन तय करने का फैसला ले लिया और उन्होंने पांच माह पहले दीक्षा ले ली। बिना स्कूल जाए ही उन्होंने सारा ज्ञान अर्जित कर लिया। उन्होंने कहा कि मुझे जो याद करने में छह-छह माह लग जाते थे, उसे बाल मुनि चार-पांच दिन में ही याद कर लेते थे। उन्होंने कहा कि चारित्र जगत में जो कुछ भी है वह ज्ञान में है। ज्ञान दशा के कारण आनंद में परिवर्तन आ जाता है। उन्होंने कहा कि सप्ताह में एक घंटा ही सही ज्ञान के लिए समय अवश्य दें।
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