चने में घाटा तो सब्जियां उगाई:8 एकड़ की खेती 400 एकड़ में फैली‎, किसान अरुण 5 राज्यों में कर रहे सब्जियों की सप्लाई, 100 मैनेजर रखे, 600 ग्रामीणों को रोजगार

Oct 26, 2026 - 09:20
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चने में घाटा तो सब्जियां उगाई:8 एकड़ की खेती 400 एकड़ में फैली‎, किसान अरुण 5 राज्यों में कर रहे सब्जियों की सप्लाई, 100 मैनेजर रखे, 600 ग्रामीणों को रोजगार
जिले के 42 वर्षीय किसान और वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा आज आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की एक जीती-जागती मिसाल बन चुके हैं। महज 18 साल की उम्र में सिर्फ 8 से 10 एकड़ जमीन से अपने सफर की शुरुआत करने वाले अरुण आज 400 एकड़ के रकबे में सब्जियों का एक बड़ा एम्पायर चला रहे हैं। उनकी सफलता का यह सफर बेहद कांटों भरा रहा है। अरुण सार्वा ने साल 2006 में बड़े पैमाने पर चने की खेती के साथ अपने कृषि सफर की शुरुआत की थी। फसल बेहद अच्छी थी, लेकिन ऐन वक्त पर हुई भारी बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पूरी फसल बर्बाद हो गई। इस भारी नुकसान के कारण उन पर करीब 15 लाख का कर्ज चढ़ गया। कम उम्र में इतने बड़े घाटे की वजह से परिवार में भी नाराजगी थी। कर्ज का दबाव इतना था कि कोई भी आम इंसान हिम्मत हार जाता। अरुण ने पीछे हटने के बजाय नई रणनीति के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया। कर्ज के दलदल से बाहर निकलने के लिए अरुण सार्वा ने पारंपरिक खेती का ढर्रा छोड़ दिया। उन्होंने फसल चक्र परिवर्तन को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। शुरुआत में उन्होंने मिर्च की खेती की। जानकारी के अभाव में वहां भी नुकसान झेलना पड़ा। इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी। वैज्ञानिक तरीके से टमाटर, करेला, खीरा और शिमला मिर्च जैसी नकदी फसलों की खेती शुरू की। वैज्ञानिक पद्धति से की गई इस खेती ने जल्द ही रंग दिखाना शुरू किया। एक बार मुनाफा होना शुरू हुआ। अरुण ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे धमतरी के नगरी, बिरनपुर, सांकरा, सिहावा, कल्लेमेटा, सरोना, खिड़कीटोला और फरसिया जैसे कई इलाकों में 400 एकड़ भूमि पर आधुनिक खेती कर रहे हैं। उनके खेतों में उगने वाली सब्जियां न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बाजारों में भी भारी मांग के साथ सप्लाई की जाती हैं। जिले में आधुनिक खेती की नींव रखने वाले अरुण सार्वा तकनीक और पर्यावरण के संतुलन पर पूरा भरोसा करते हैं। वे रासायनिक दवाओं के सीमित इस्तेमाल के साथ जैविक उर्वरक और केंचुआ (वर्मीकम्पोस्ट) खाद को प्राथमिकता देते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी सूझबूझ से एक ट्रैक्टर-अटैच स्प्रे मशीन तैयार की है। यह मशीन ट्रैक्टर के चलने के साथ-साथ फसलों पर दवाओं और पोषक तत्वों का स्वचालित छिड़काव करती है। इस नवाचार से न सिर्फ समय की भारी बचत होती है, बल्कि लेबर का खर्च भी काफी कम हो जाता है। अरुण सार्वा ने खेती को घाटे के सौदे के टैग से बाहर निकालकर एक सफल कॉर्पोरेट बिजनेस मॉडल में बदल दिया है। आज उनकी इस खेती के जरिए 600 से अधिक स्थानीय ग्रामीणों को सीधा रोजगार मिला हुआ है। खेती के बेहतर और सुचारू प्रबंधन के लिए उन्होंने 100 कुशल लोगों को बतौर मैनेजर काम पर रखा है। ये लोग अलग-अलग ब्लॉकों की कमान संभालते हैं। अब अरुण की इस सफलता को देखने और आधुनिक खेती के गुर सीखने दूर-दराज के जिलों और अन्य राज्यों से भी किसान धमतरी पहुंच रहे हैं। कृषि क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए अरुण सार्वा आगामी नवंबर महीने में दीपावली के बाद उन्नति खेती पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित करने जा रहे हैं। इस प्रशिक्षण शिविर में धमतरी सहित पूरे प्रदेश के कृषि प्रेमी, युवा और महिलाएं शामिल होकर आधुनिक कृषि के गुर सीखेंगे। इन प्रगतिशील किसान से और जानें... नंबर- 8821021121

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