धमतरी में गणगौर शोभायात्रा, महिलाएं राजस्थानी परिधान में थिरकीं:युवतियों ने मनचाहे पति, सुहागिनों ने अखंड सुहाग के लिए की पूजा

Mar 22, 2026 - 11:08
 0  0
धमतरी में गणगौर शोभायात्रा, महिलाएं राजस्थानी परिधान में थिरकीं:युवतियों ने मनचाहे पति, सुहागिनों ने अखंड सुहाग के लिए की पूजा
छत्तीसगढ़ के धमतरी में गणगौर पर्व मनाया गया। 16 दिनों तक घरों में माता गौरी और ईशर (भगवान शिव) की स्थापना कर नियमित पूजा-अर्चना की गई। पर्व के अंतिम दिन बाजे-गाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी परिधान में नृत्य करती नजर आईं। शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय रहा। शोभायात्रा की शुरुआत बाबा रामदेव मंदिर से हुई। जुलूस इतवारी बाजार, तहसील कार्यालय, कचहरी चौक, सदर बाजार, नूरानी चौक, भगत चौक, कोस्टापारा, नंदी चौक से होते हुए कठोली तालाब पहुंचा। कठोली तालाब में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना के साथ पर्व का समापन किया गया। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। स्वर्णकार समाज की महिलाओं ने बताया कि शोभायात्रा उनके समाज की पहल पर निकाली गई। बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में हिस्सा लिया। यह पर्व होली के दूसरे दिन से शुरू होता है। 15 दिनों तक गणगौर माता घरों में विराजती हैं। अंतिम दिन ईशर गणगौर को लेने आते हैं, इसके बाद माता की विदाई होती है। पांडोली से होती है स्थापना होली की रात पांडोली बनाकर गणगौर माता की स्थापना की जाती है। इन दिनों में पूजा-अर्चना, घर-घर भ्रमण, हल्दी, मेहंदी, भोजन, संगीत जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। गणगौर भगवान शिव और माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है। ‘गण’ का अर्थ शिव, ‘गौर’ का अर्थ पार्वती है। यह पर्व दांपत्य सुख का प्रतीक है। सौभाग्य और मनोकामना का पर्व कुंवारी युवतियां मनचाहे वर की कामना करती हैं। विवाहित महिलाएं अपने अखंड सुहाग के लिए पूजा करती हैं। अंतिम दिन गणगौर की विदाई से पहले घर-घर जाकर पूजा की जाती है। इसके बाद बारी-बारी से माता को विदा किया जाता है। मारवाड़ी समाज में इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0