नाबालिग को घर बुलाकर रेप, 10 साल की सजा:DNA रिपोर्ट से साबित हुआ जुर्म; पिता को मारने की धमकी देकर कई बार किया गलत काम

Jan 31, 2026 - 09:10
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नाबालिग को घर बुलाकर रेप, 10 साल की सजा:DNA रिपोर्ट से साबित हुआ जुर्म; पिता को मारने की धमकी देकर कई बार किया गलत काम
विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) ने नाबालिग को घर बुलाकर रेप करने और उसे गर्भवती करने के मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी अजीम उर्फ राजू को दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 6 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। मामले में डीएनए रिपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई, जिसके आधार पर कोर्ट ने माना कि आरोपी ही पीड़ित के बच्चे का पिता है। यह फैसला न्यायाधीश राकेश कुमार शर्मा ने सुनाया। प्रभारी सहायक निदेशक व अभियोजन अधिकारी योगेश कुमार तिवारी ने बताया कि पीड़िता ने 2 नवंबर 2022 को औद्योगिक क्षेत्र थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, वह अजीम उर्फ राजू (25) पिता राजा मंसूरी निवासी प्रौढ़ शिक्षा गारंटी स्कूल के पीछे डीजल शेड को 9 माह से जानती थी। पीड़िता के घर के सभी सदस्य मजदूरी करने रोज बाहर जाते हैं। 28 फरवरी 2022 को वह घर पर अकेली थी। सुबह 10 बजे अजीम उसके घर आया और कहा कि मेरी मम्मी तुम्हें मेरे घर बुला रही है। जब वह उसके घर गई तो वहां उसकी मम्मी नहीं थी। अजीम ने कहा कि वे दुकान गई हैं, आती ही होंगी। इसके बाद वह उसे दूसरे कमरे में ले गया और मर्जी के खिलाफ गलत काम किया। उसने धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो जान से खत्म कर दूंगा और बदनामी कर दूंगा। भाई के जरिए बुलाता था, 23 बार किया शोषण पीड़िता ने बताया कि अजीम अपने भाई को उसे बुलाने के लिए भेजता था। उसने करीब 23 बार उसे घर पर बुलाया। भाई उसे अजीम के पास छोड़कर दरवाजा बाहर से बंद कर देता था। अजीम ने डरा-धमकाकर कई बार उसकी इच्छा के खिलाफ रेप किया। विरोध करने पर वह पिता को जान से मारने की धमकी देता था। अजीम कहता था, "तू मेरी बात नहीं मानेगी तो मैं तेरे बाप को, जो रोज दारू के नशे में रहता है, उसे कभी भी मरवा दूंगा।" डर के कारण पीड़िता ने यह बात किसी को नहीं बताई। पेट निकलने पर बहन ने कराई जांच, तब खुला राज जब पीड़िता का पेट निकलने लगा, तो उसकी बड़ी बहन ने अस्पताल में जांच करवाई। रिपोर्ट में पता चला कि वह गर्भवती है। इसके बाद उसने हिम्मत करके पूरी बात अपनी मां को बताई। पीड़िता की बहन ने जब अजीम की मां को जानकारी दी, तो उन्होंने इलाज करवाने से साफ मना कर दिया। बाद में जब पीड़िता के माता-पिता ने अजीम के परिजनों से बात की, तो वे उल्टे गालियां देने लगे और जान से मारने की धमकी दी। भाई और मां सबूतों के अभाव में बरी शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक गौतम परमार ने की। कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर अजीम को पीड़िता के बच्चे का पिता मानते हुए रेप का दोषी करार दिया और 10 साल की सजा सुनाई। वहीं, आरोपी के भाई और मां को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।

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