लहूलुहान लाशें पड़ी थीं, लोग मोबाइल-पर्स चुरा ले गए:घायल बोला- गाड़ी में नींद लगी, अस्पताल में आंख खुली; अयोध्या में हुए हादसे में तीन मौतें

Dec 13, 2025 - 10:02
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लहूलुहान लाशें पड़ी थीं, लोग मोबाइल-पर्स चुरा ले गए:घायल बोला- गाड़ी में नींद लगी, अस्पताल में आंख खुली; अयोध्या में हुए हादसे में तीन मौतें
हम गुजरात में काम करते हैं। 15 दिसंबर को वापस जाने वाले थे। उससे पहले अयोध्या जाने का प्लान बन गया। घटना वाली रात गाड़ी से रात 11 बजे निकले। सुबह करीब 5 बजे अयोध्या पहुंचने वाले थे, लगभग 10 किलोमीटर बचा था। रास्ते में आंख लग गई और जब खुली तो अस्पताल में थे। यह बताते हुए मऊगंज जिले के आशीष पटेल सहम जाते हैं। उनके चेहरे और सिर में गहरी चोट है। वह परिवार के 9 लोगों के साथ गुरुवार को अयोध्या राम मंदिर दर्शन के लिए जा रहे थे। मौके पर लहूलुहान घायल और लाशें पड़ी थीं, लेकिन बदमाश मोबाइल, पर्स और सामान चुरा ले गए। सभी जिले के बेलहई गांव में रहते थे। जो परिवार अपनी आपसी एकजुटता के लिए जाना जाता था, आज बिखर चुका है। तीन भाइयों का 14 सदस्यीय परिवार, जहां हर त्योहार, हर खुशी साथ मनाई जाती थी, अब मातम में डूब गया है। दैनिक भास्कर की टीम ने शुक्रवार को घायलों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर घटनाक्रम जाना। पढ़िए रिपाेर्ट…. अयोध्या से 10 किमी पहले हुआ हादसा घटना 11 दिसंबर की सुबह करीब 5 बजे कल्याण भदरसा गांव के पास नेशनल हाईवे पर हुई। जिले के बेलहाई गांव निवासी पटेल परिवार बोलेरो (MP17TA2441) में सवार होकर देर रात अयोध्या के लिए निकला था। 10 दिसंबर की रात 11 बजे परिवार के 10 सदस्य बोलेरो में बैठकर भगवान रामलला के दर्शन के लिए निकले थे। सुबह करीब 5 बजे, कल्याण भदरसा गांव के पास बोलेरो की ट्रैक्टर-ट्रॉली से भिड़ंत हो गई। ट्रॉली में लाइट नहीं थी। हल्का कोहरा भी छाया था। बोलेरो तेज रफ्तार में थी। टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि बोलेरो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में मीराबाई पटेल, अंकिता पटेल और ड्राइवर रामयश मिश्रा की मौत हो गई। बाकी 8 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, कुछ ICU में जिंदगी से लड़ रहे हैं। ड्राइवर राम यश मिश्रा (50) रीवा जिले के जोगिनिहाई के रहने वाले थे। वहीं, अंकिता पटेल (25) और मीराबाई पटेल (50) दोनों निवासी बेलहाई, थाना मऊगंज में रहते थे। वहीं, चित्रसेन पटेल, दीपक पटेल, आशीष पटेल, तनुजा पटेल, चंद्र काली पटेल, कुसुमवती पटेल, शशी पटेल और 5 साल का शिवांश पटेल घायल हो गए। पति बोला- एक पल में जिंदगी बदल गई मृतक मीराबाई पटेल के पति महेंद्र मणि पटेल ने बताया- मीराबाई बाई कल रात 11 बजे अयोध्या के लिए निकली थीं। मैं उन्हें सड़क तक छोड़ने आया था। जाते-जाते बस इतना कहा- ‘दूध यहीं रखा है, कॉफी-शक्कर रखी है, सुबह बना लेना। पूरी सब्जी भी रखी है, सुबह खा लेना… दोपहर में चावल-दाल भी रखी है, गैस पर गरम कर लेना।’ मैंने कहा, ‘ठीक है, आप लोग जाइए, हम बना लेंगे।’ फिर वे गाड़ी में बैठीं और चल गईं। मुझे क्या पता था कि यही हमारी आखिरी मुलाकात होगी। महेंद्र मणि पटेल ने बताया कि इसके बाद जब सुबह नींद खुली तो गांव की ममता आई और पूछने लगी ‘आशीष पटेल कौन है?’ मैंने कहा, ‘मेरे भतीजे का नाम है, वह भी अयोध्या गए हैं। वह कुछ बताना चाह रही थी, पर मैं समझ नहीं पाया। उन्होंने बताया- कल रात 11 बजे तक वे हमारे साथ थीं, घर के खाने-पीने की चिंता कर रही थीं… और आज सब कुछ बदल गया। मुझे क्या पता था कि यह रात इतनी भयावह साबित होगी कि मेरी पूरी जिंदगी ही बदल जाएगी। वहीं हादसे में मृत अंकिता पटेल (25) अपने पिता के साथ गुजरात में रहती थी 16 नवंबर को गुजरात से गांव आई थी 23 नवंबर को उसकी मामा की बेटी की शादी थी। अंकिता के पिता घटना की जानकारी देते हुए भावुक हाे गए। उन्होंने बताया- हमारी आखिरी मुलाकात 16 नवंबर को अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर हुई थी। मैं खुद उसे घर के लिए छोड़ने गया था। उसने AC का टिकट लिया था। वह पढ़ी-लिखी और समझदार लड़की थी। जाते समय बस इतना ही बोली- ‘पापा, मैं जा रही हूं, शादी के दो-चार दिन बाद वापस आ जाऊंगी।’ मामा की बेटी की शादी 23 नवंबर को थी। मैं भी भावुक था, क्योंकि मुझे बाहर का खाना खाने में दिक्कत रहती है। वह यही कहकर गई कि ‘पापा, मैं जल्दी आ जाऊंगी।’ अहमदाबाद में ड्यूटी पर थे, फ्लाइट से निकले उन्होंने बताया- उस समय मैं ड्यूटी पर था, लेकिन 5 मिनट लेट हुआ ही था कि फोन आया। मैंने तुरंत अपनी सिक्योरिटी सुपरवाइज़र और एचआर को बताया। उन्होंने कहा कि ‘आप तुरंत निकलो, टिकट की व्यवस्था हम कर देंगे।’ इसके बाद शायद उन्होंने सेठ से बात की और मेरे लिए अहमदाबाद से बनारस की फ्लाइट बुक कराई। रात 9 बजे मैं बनारस पहुंचा, लेकिन वहां से सीधे घर जाने की गाड़ी नहीं थी। फिर मैं इलाहाबाद गया। वहीं से भतीजा भी बॉडी लेकर आ रहा था। सभी रास्ते में ही थे। उन्होंने पूछा ‘चाचा, आप कहाँ हैं?’ मैंने कहा- ‘इलाहाबाद में हूं।’ उन्होंने कहा कि तीन घंटे लगेंगे, इंतजार कर लो। मैं रातभर वहीं बैठा रहा। सुबह करीब 6 बजे संगम के पास मिलना हुआ। फिर हम सब साथ में घर के लिए रवाना हुए।” भाई के साथ वापस गुजरात आने वाली थी अंकिता अपने भाई आशीष के साथ 15 दिसंबर को वापस गुजरात जाने वाली थी। इसी बीच बड़ी मां मीरा देवी सहित परिवार जनों ने अयोध्या दर्शन का प्लान बनाया। 10 दिसंबर की रात 11 बजे दर्शन के लिए गए अयोध्या के लिए निकले थे। 11 दिसंबर की सुबह 5 बजे अयोध्या से 10 किलोमीटर पहले ही हादसे का शिकार हो गए। हादसे में अंकिता पटेल की मां कुसुमकली घायल हैं। अस्पताल में भर्ती कुसुम कली पटेल ने बताया- हम बोलेरो से अयोध्या जा रहे थे। सामने से बस आ रही थी और दूसरी तरफ से ट्रैक्टर। अचानक पता नहीं क्या हुआ, जोरदार टक्कर हो गई। हमें नहीं समझ आया कि कौन बचाने आया, कौन नहीं… होश आया तो अस्पताल में थे। हम 10 लोग गाड़ी में थे और सभी एक ही परिवार के। घर के बच्चे बाहर काम करते हैं। उन्हें शनिवार को वापस नौकरी पर जाना था, इसलिए बोले थे। ‘अयोध्या से लौटकर 15 तारीख को वापस चले जाएंगे।’ लेकिन किसे पता था कि यह सफर ऐसा बन जाएगा। गाड़ी में नींद लगी, अस्पताल में आंख खुली हादसे में घायल आशीष पटेल ने बताया- जहां हादसा हुआ, वहां पास में एक ढाबा है। हमारे ड्राइवर ने अचानक ट्रॉली को नहीं देखा और समझ नहीं पाया। गाड़ी तेज रफ्तार में थी और अचानक टक्कर हो गई। हमारी साइड पर गाड़ी होने के कारण हम सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।” दो साल का मासूम बार-बार पूछ रह-“मां कहां है?” स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे ने तीन भाइयों के इस संयुक्त परिवार को भीतर तक हिला दिया है। किसी की पत्नी ICU में है, किसी का बेटा गंभीर है। दो साल का मासूम शिवांश पटेल बार-बार पूछ रहा है- “मां कहां है?” उसे नहीं बताया गया कि मां शशी पटेल अस्पताल में है और दादी मीराबाई कभी वापस नहीं आने वाली। लोग बोले- किस्मत में यही लिखा था शुक्रवार को जब अंकिता और मीराबाई के शव गांव पहुंचे। यहां बेलहई में सन्नाटा पसर गया। सैकड़ों लोग घर के बाहर जमा हो गए। हर किसी ने बस एक ही बात कही- “रामलला के दर्शन करने निकले थे… किस्मत में यह लिखा था।” वाहन चालक रामयश मिश्रा का भी रीवा जिले में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके परिवार की हालत भी बेहद खराब है।

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