मुकुट पहनाने की अनुमति नहीं, प्रधानमंत्री प्रोटोकॉल तोड़ खुद मिले...VIDEO:रामनामी बोले- लोकसभा चुनाव में वादा किया था, फिर PM बने तो मोर-मुकुट पहनाएंगे

Nov 2, 2025 - 15:33
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मुकुट पहनाने की अनुमति नहीं, प्रधानमंत्री प्रोटोकॉल तोड़ खुद मिले...VIDEO:रामनामी बोले- लोकसभा चुनाव में वादा किया था, फिर PM बने तो मोर-मुकुट पहनाएंगे
छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के रामनामी समाज के सदस्यों ने 1 नवंबर को रायपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जहां समाज के लोगों ने प्रधानमंत्री को मोर मुकुट भेंट किया। दरअसल, समाज के सदस्यों ने प्रधानमंत्री को मोर मुकुट पहनाना चाहा, लेकिन सुरक्षा कारणों से मुकुट को मंच पर लाने की अनुमति नहीं मिली थी। जैसे ही पीएम मोदी को इस बात की जानकारी हुए उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से कहा कि उन्हें आने दो। उन्होंने सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए मोर मुकुट को अंदर लाने कहा। इस दौरान पीएम ने मंच पर मोर मुकुट पहना और उनसे चर्चा भी की। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल हो रहा है। रामनामी समाज सदस्यों ने बताया कि पीएम को मोर मुकुट पहना कर उन्हें बहुत अच्छा लगा। लोकसभा चुनाव में वे पीएम मोदी से मिले थे। तब उन्होंने पीएम मोदी से वादा किया था कि दोबारा प्रधानमंत्री बनकर आएंगे तो मोर मुकुट पहनाकर स्वागत किया जाएगा। पहले देखिए ये तस्वीरें- खुशी व्यक्त कर जताया आभार रामनामी समाज के जिन सदस्यों के पीएम से मुलाकात की है वे बिलाईगढ़ विकासखंड के चंदलीडीह गांव के रहने वाले हैं। समाज के अध्यक्ष सेतबाई रामनामी और महासचिव गुलाराम रामनामी ने प्रधानमंत्री से मिलकर खुशी व्यक्त की और उनका आभार जताया। दोबारा प्रधानमंत्री बनकर आने का था वादा गुलाराम रामनामी ने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान सक्ती जिले में प्रधानमंत्री के आगमन पर उनसे मुलाकात हुई थी। तब सेतबाई ने वादा किया था कि जब वे दोबारा प्रधानमंत्री बनकर छत्तीसगढ़ आएंगे, तो उनका मोर मुकुट पहनाकर स्वागत किया जाएगा। गुलाराम रामनामी ने यह भी कहा कि उनके समाज की कई सालों से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की इच्छा थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह चाहत पूरी होने पर भी आभार व्यक्त किया। अब जानिए रामनामी समुदाय के बारे में... देश में 1.5 लाख रामनामी, छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा आबादी समाज के सदस्य के अनुसार 'पहले हमारे समाज के लोगों को ऊंची जाति के लोग मंदिरों में जाने नहीं देते थे। कहते थे कि तुम लोग अछूत हो। 1890 में आज के छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा के एक दलित युवक ने विरोध में अपने पूरे शरीर पर ही राम-राम लिखवा लिया। उसको देखकर दूसरे लोग भी अपने शरीर पर राम नाम लिखवाने लगे। धीरे-धीरे यह परंपरा बन गई।' रामनामी परंपरा को मानने वाले दलित कम्युनिटी से आते हैं। पूरे देश में इस समय करीब 1.5 लाख रामनामी हैं। छत्तीसगढ़ में इनकी आबादी सबसे ज्यादा है। हालांकि अब इनकी संख्या घट रही है। वजह नए लड़के शरीर पर राम नाम लिखवाने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा करने से बड़े शहरों में नौकरी नहीं मिलती है। ......................................... इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ राज्योत्सव...PM बोले-लाल झंडे की जगह लहरा रहा तिरंगा:कहा-कुछ लोग संविधान का दिखावा करते हैं; रेलवे स्टेशनों पर पहली बार बजा राज्य गीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के मौके पर रजत महोत्सव का उद्घाटन किया। मोदी ने PM आवास योजना के 5 हितग्राहियों को चाबियां सौंपी। PM मोदी ने छत्तीसगढ़ी में भाषण की शुरुआत की। मोदी ने कहा कि जम्मो भाई-बहनी, लइका, सियान मन ल हाथ जोड़ के जय जोहार। पढ़ें पूरी खबर...

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