गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी शताब्दी:लोरमी पहुंची शहादत यात्रा, सिख समाज ने किया स्वागत; गुरु ग्रंथ साहिब के किए दर्शन

Oct 7, 2025 - 09:49
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गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी शताब्दी:लोरमी पहुंची शहादत यात्रा, सिख समाज ने किया स्वागत; गुरु ग्रंथ साहिब के किए दर्शन
मुंगेली जिले के लोरमी में सिख धर्म के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहीदी शताब्दी मनाई गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सिख संगठन ने शहादत यात्रा निकाली। स्थानीय सिख समाज ने इस यात्रा का स्वागत किया, जो गुरु साहिब के बलिदान को समर्पित है। रायपुर से शुरू हुई यह यात्रा पंज प्यारों की अगुवाई में शबद कीर्तन करते हुए नगर में पहुंची। जहां सड़कों पर फूल बिछाकर यात्रा का स्वागत किया गया, जो आस्था और श्रद्धा का दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। कीर्तन का समापन लोरमी गुरुद्वारा में हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब जी के दर्शन किए। ऐसा था गुरु साहिब का बलिदान समाज के सदस्यों ने बताया कि गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने कश्मीरी पंडितों की पुकार पर धर्म, तिलक और जनेऊ की रक्षा के लिए अत्याचारी मुगल बादशाह औरंगजेब की नीतियों का डटकर मुकाबला किया था। परिणामस्वरूप, उन्हें दिल्ली में उनके तीन वफादार साथियों भाई सती दास, भाई मति दास और भाई दयाला जी सहित सैकड़ों अनुयायियों के साथ गिरफ्तार किया गया। चांदनी चौक में सैकड़ों शिष्यों को शहीद करने के बाद, भाई सती दास जी को आरी से चीर दिया गया, भाई मति दास जी को जीवित जला दिया गया और भाई दयाला जी को उबाल कर मार डाला गया। अंत में, गुरु साहिब का शीश धड़ से अलग कर दिया गया। आज दिल्ली के चांदनी चौक में शीश गंज और रकाब गंज गुरुद्वारा इन शहीद स्थलों के साक्षी हैं। सिख समुदाय का इतिहास हमेशा से देशभक्ति और सेवा का प्रतीक रहा है। मुगल काल से लेकर अंग्रेजी शासन, 1965-71 के युद्धों और कोरोना महामारी के दौरान भी सिख समाज ने अग्रणी भूमिका निभाई है। गुरुद्वारा परिसर में आयोजित सभा में सिख समाज के मीडिया प्रभारी आकाश सलूजा ने मंच संचालन किया।

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