पवित्र नगरी अमरकंटक में गणेश प्रतिमाओं का भावपूर्ण विसर्जन भक्तों ने ढोल-ढमाकों और जयकारों के बीच बप्पा को दी विदाई
अमरकंटक। धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी अमरकंटक में भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्दशी, अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर भगवान गणेश की प्रतिमाओं का भावपूर्ण विसर्जन किया गया। श्रद्धालुओं ने नर्मदा जल से भरे बने विसर्जन कुंड में बप्पा को नाचते-गाते, ढोल-ढमाकों और जयकारों के साथ विदा किया। श्रद्धा और उल्लास का संगम शुक्रवार 5 सितम्बर से ही भक्तों द्वारा गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन प्रारंभ हो गया था, जो रविवार 7 सितम्बर (पूर्णिमा) तक लगातार चलता रहेगा। समाचार लिखे जाने तक एक सैकड़ा से अधिक गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा चुका था। “गणपति बप्पा मोरया… अगले बरस तू जल्दी आना” – यह जयघोष पूरे नगर में गूंजता रहा। दूर-दराज़ से पहुंचे श्रद्धालु पुष्पराजगढ़, राजेन्द्रग्राम, अनूपपुर, बुढ़ार, धनपुरी सहित आसपास के अनेक क्षेत्रों से भक्तजन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन करने पहुंचे। विसर्जन से पूर्व श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं का विधिवत पूजन-अर्चन और आरती कर बप्पा से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और शांति की मंगल कामनाएँ कीं। “भक्ति और आनंद में डूबा अमरकंटक का वातावरण बप्पा के गीतों से गूंज उठा।” सुरक्षा और व्यवस्थाएँ विसर्जन स्थल पर नगर परिषद अमरकंटक के कर्मचारी लगातार मुस्तैद रहे। पुलिस बल पूरी तरह सतर्क और तैनात रहा, वहीं राजस्व विभाग के निरीक्षक और पटवारी ने भी चाक-चौबंद व्यवस्था बनाए रखी। साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था का भी समुचित प्रबंध किया गया ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। “बप्पा को विदा करते समय हर आँख नम और हर मन उल्लास से भर गया।” - इस प्रकार अमरकंटक की पावन धरती पर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
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