केदारनाथ धाम पर अवैध तरीके से पहुंच रहे लोग:चट्टान में दरार आने से है प्रतिबंध; कोई ब्लॉग बना रहा, तो कोई गानों की शूटिंग कर रहा
गुना जिले के बमोरी क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में पहाड़ी की चट्टान में आई खतरनाक दरार के कारण मंदिर परिसर को दो साल पहले आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था। इसके बावजूद लोग सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी कर दूसरे रास्तों से मंदिर तक पहुंच रहे हैं। कोई सोशल मीडिया के लिए रील और ब्लॉग बना रहा है तो कोई गर्भगृह में गानों की शूटिंग कर रहा है। इससे बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है। दो साल से आमजन के लिए बंद है केदारनाथ धाम बमोरी विधानसभा क्षेत्र में स्थित केदारनाथ धाम शिव मंदिर जिले का प्रमुख धार्मिक स्थल है। सावन और महाशिवरात्रि पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बारिश के मौसम में यहां बहने वाले झरने भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हालांकि, मंदिर के ऊपर स्थित विशाल चट्टान में आई दरार लगातार चौड़ी होने के कारण प्रशासन ने करीब दो वर्ष पहले पूरे क्षेत्र को आम लोगों के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। मुख्य गेट पर ताला, फिर भी दूसरे रास्तों से पहुंच रहे लोग मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग वैकल्पिक रास्तों से पहाड़ी के नीचे उतरकर मंदिर परिसर तक पहुंच रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि लोग उसी क्षतिग्रस्त चट्टान के नीचे से गुजर रहे हैं, जहां कभी भी बड़ा भू-स्खलन या चट्टान गिरने की आशंका बनी हुई है। रील, ब्लॉग और गानों की शूटिंग बन रही खतरे की वजह प्रतिबंध के बावजूद सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वालों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। कई लोग मंदिर परिसर में रील, ब्लॉग और वीडियो शूट कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग गर्भगृह तक पहुंचकर गानों की शूटिंग कर रहे हैं। इन वीडियो को सोशल मीडिया पर भी साझा किया जा रहा है, जिससे अन्य लोग भी वहां जाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। जीएसआई की रिपोर्ट के बाद लिया गया था फैसला वन विभाग के प्रतिवेदन के बाद भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक मनोज कुमार ने स्थल का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया था कि क्षतिग्रस्त चट्टान कभी भी गिर सकती है और आम लोगों की मौजूदगी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। रिपोर्ट में चट्टान हटाने और सुरक्षा के लिए कंक्रीट की दीवार बनाने तक पूरे क्षेत्र को बंद रखने की सिफारिश की गई थी। कलेक्टर ने जारी किया था प्रतिबंध आदेश जीएसआई की रिपोर्ट और वन विभाग की अनुशंसा के आधार पर तत्कालीन कलेक्टर ने सुरक्षा कारणों से केदारनाथ धाम मंदिर क्षेत्र को आगामी आदेश तक आमजन के लिए बंद करने के निर्देश जारी किए थे। बावजूद इसके, लोग प्रतिबंध की अनदेखी कर लगातार वहां पहुंच रहे हैं। बड़ा सवाल—हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन? स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने क्षेत्र में प्रवेश पर रोक लगा रखी है, लेकिन निगरानी के अभाव में लोग आसानी से दूसरे रास्तों से अंदर पहुंच रहे हैं। ऐसे में यदि चट्टान गिरने जैसी कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
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