खदान तक रास्ता दिखाने सैकड़ों पेड़ काटकर खाई में फेंके, विभाग ने दर्ज किया वन अपराध

Jun 9, 2026 - 08:34
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खदान तक रास्ता दिखाने सैकड़ों पेड़ काटकर खाई में फेंके, विभाग ने दर्ज किया वन अपराध
भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा आलनार पहाड़ को बचाने और आरती स्पंज एंड पावर लिमिटेड को आवंटित लौह अयस्क खदान लीज के विरोध में बस्तरिया राज मोर्चा द्वारा निकाली जा रही पदयात्रा सोमवार को कड़मपाल गांव पहुंच गई। पदयात्रा अब भांसी होते हुए 11 जून को दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय पहुंचेगी। वहां प्रदर्शन और जनसभा की तैयारी की जा रही है। विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि 31.56 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित जिस पहाड़ की लीज कंपनी को मिली है, वहां तक पहुंचने के लिए अब तक समुचित सड़क भी नहीं थी। आरोप है कि कथित फर्जी ट्रांसपोर्टिंग का मामला सामने आने के बाद अब अचानक पहाड़ तक पहुंच मार्ग तैयार किया जा रहा है। पिछले दो दिनों में सैकड़ों हरे-भरे पेड़ काटकर सड़क निर्माण का काम शुरू किया गया है। आंदोलनकारियों का सवाल है कि यदि कंपनी के पास पेड़ कटाई की वैध अनुमति थी, तो कटे हुए पेड़ों की नंबरिंग, पंचनामा और लकड़ी को वन विभाग के डिपो में जमा कराने जैसी प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई। उनका आरोप है कि कई पेड़ों को काटकर खाई में फेंक दिया गया है। इससे साक्ष्य भी मिटाए जा रहे हैं। मामले में वन विभाग ने केस भी दर्ज कर लिया है। आरोप है कि आलनार की पहाड़ी में खनन शुरू होने से क्षेत्र की जल, जंगल और जमीन पर गंभीर असर पड़ेगा। मोर्चा के संयोजक मनीष कुंजाम और आंदोलन से जुड़े ग्रामीणों का आरोप है कि आरती स्पंज को मिली खदान लीज में वर्षों से बड़ा खेल चल रहा है। उनका कहना है कि जिस खदान क्षेत्र में आज तक वास्तविक खनन गतिविधियां दिखाई नहीं देतीं, वहां सरकारी रिकॉर्ड में उत्पादन और परिवहन दर्ज होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आंदोलनकारियों के मुताबिक वर्ष 2018 से 2025 के बीच लाखों टन लौह अयस्क का उत्पादन और परिवहन दर्शाया गया। खदान क्षेत्र में न तो बड़े पैमाने पर मशीनरी मौजूद थी। न ही खनन के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित की गई थी। आलनार में पेड़ कटाई के मामले को वन विभाग ने भी गंभीरता से लिया है। विभाग ने अज्ञात लोगों के खिलाफ पीओआर (प्राथमिक वन अपराध प्रकरण) दर्ज किया है। अब कटे हुए पेड़ों के ठूंठों की गिनती की जाएगी। मौके की जांच भी होगी। डीएफओ रंगानाधा रामाकर्षणा वाय ने बताया कि पेड़ों की कटाई किसने की, इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरती स्पंज को अभी पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में बिना स्वीकृति पेड़ कटने का मामला जांच के दायरे में है। आलनार खदान को लेकर बढ़ता विवाद अब खनन, पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के बड़े मुद्दे के रूप में उभर रहा है। 11 जून को दंतेवाड़ा पहुंचने वाली पदयात्रा के साथ यह आंदोलन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। आलनार खदान का सबसे पहले विरोध करने वाले गांव के कुछ स्थानीय लोग अब खनन के पक्ष में हैं। सूत्रों के अनुसार ग्रामीणों और कंपनी के बीच 19 बिंदुओं पर एमओयू हुआ है। इसी आधार पर गांव के कुछ लोग खनन के लिए सहमत हुए हैं। हालांकि बस्तरिया राज मोर्चा इस समझौते का विरोध कर रहा है। मनीष कुंजाम का कहना है कि यह समझौता विकास के नाम पर दिया गया लालच है। आंदोलनकारियों ने यह आरोप भी लगाया कि बैलाडीला से कथित तौर पर होने वाली लौह अयस्क चोरी और आलनार खदान के रिकॉर्ड में दर्ज परिवहन के बीच संबंधों की जांच होनी चाहिए। दावा है कि पूरे मामले में एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। हालांकि आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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