रायपुरिया में नानी बाई का मायरा कथा का समापन:पंडित ने सुनाया नरसिंह मेहता प्रसंग; बोले-भगवान भक्तों की व्याकुलता सहन नहीं करते

Apr 22, 2026 - 09:30
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रायपुरिया में नानी बाई का मायरा कथा का समापन:पंडित ने सुनाया नरसिंह मेहता प्रसंग; बोले-भगवान भक्तों की व्याकुलता सहन नहीं करते
झाबुआ के रायपुरिया में तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा कथा का मंगलवार रात समापन हो गया। यह आयोजन प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष्य में किया गया था। कथा के अंतिम दिन मंगलवार की रात में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा व्यास पंडित श्याम सुंदर त्रिवेदी ने अपनी मधुर वाणी में नानी बाई के मायरे का प्रसंग सुनाया। उन्होंने जीवन दर्शन से जुड़ी सीख भी दी। पंडित त्रिवेदी ने बताया कि घर में बने भोजन का सर्वप्रथम बाल गोपाल को भोग लगाना चाहिए। इसके बाद गाय और कुत्ते को ग्रास खिलाने के पश्चात ही स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए। नरसिंह मेहता भक्ति प्रसंग से गूंजा कथा पंडाल उन्होंने भक्त नरसिंह मेहता की निष्ठा का वर्णन किया। पंडित त्रिवेदी ने कहा कि भगवान अपने भक्तों की व्याकुलता सहन नहीं करते। जब भक्त सच्चे मन से पुकारता है, तो परमात्मा स्वयं मदद के लिए आते हैं। नरसिंह मेहता की लाज रखने के लिए भगवान श्रीकृष्ण स्वयं 56 करोड़ का मायरा लेकर पंडाल में पहुंचे थे। कथा में भगवान के रथ आगमन का प्रसंग आते ही पूरा पंडाल 'सांवरिया सेठ' के जयकारों से गूंज उठा। कथा के दौरान पिता और पुत्री के रिश्ते की गहराई को भी उजागर किया गया। पंडित जी ने बताया कि एक बेटी अपने ससुराल में पिता की बुराई सहन नहीं कर सकती। पिता के प्रति उसका प्रेम निस्वार्थ होता है। विदाई प्रसंग से भावुक हुए श्रद्धालु, भव्य आरती सम्पन्न विदाई के समय पिता और पुत्री का स्नेह आंसुओं के रूप में प्रकट होता है। इस प्रसंग को सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।आयोजन में ग्राम के गेंदालाल पाटीदार को मायरा भरने का अवसर मिला। कार्यक्रम का समापन भव्य आरती और प्रसादी वितरण के साथ हुआ। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के सदस्यों ने सफल आयोजन के लिए सभी नागरिकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन अशोक पाटीदार ने किया।

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