जंगल में मधुमक्खियां बढ़ाएंगी पेड़ पौधे:वन विभाग ने शेरगढ़ सेंचुरी में 10 बॉक्स लगाए, छत्ता तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
बारां के शेरगढ़ अभ्यारण (सेंचुरी) में कम होते जा रहे पेड़ पौधों को बचाने के लिए वन विभाग ने नवाचार किया है। वन्यजीव विभाग द्वारा शेरगढ़ अभ्यारण में मधुमक्खियां के छत्ते लगाए गए हैं। विभाग ने बाकायदा एक आदेश जारी कर स्टाफ को पाबंद किया है। यदि सेंचुरी में कोई भी मधुमक्खी का छत्ता तोड़ता है, तो उसके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत कोर्ट में चालान पेश किया जाए। डीसीएफ वन्यजीव कोटा अनुराग भटनागर ने बताया कि फरवरी महीने में शेरगढ़ अभ्यारण में डीप फारेस्ट एरिया में मधुमक्खी के 10 डिब्बे रखवाए हैं। एक डिब्बे में 5 से 20 हजार मधुमक्खियां हैं। अगले दो-तीन साल में इनकी संख्या बढ़ जाएगी। क्यों पड़ी जरूरत डीसीएफ अनुराग भटनागर ने बताया-अभ्यारण में पेड़ पौधों की संख्या कम हो रही थी। इसको लेकर विभाग की तरफ से अभ्यारण में सर्वे करवाया गया। जिसमें दीमक (बाम्बी) के घोंसले, मधुमक्खी, सूखे पेड़, रेपटर्स, बर्ड की संख्या सहित 10 टॉपिक पर सर्वे करवाया। उन्होंने कहा कि चार महीने तक टीम ने सर्वे किया। सर्वे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। सेंचुरी में 1 हजार मधुमक्खियों के छत्ते होने चाहिए थे। इसके बजाय केवल 150 छत्ते ही मिले। जंगल में अगर मधुमक्खियां ज्यादा रहती है तो जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है। जिसके बाद स्टडी की गई और बाकायदा टेंडर जारी किए। स्टाफ को ट्रेनिंग करवाई। 2 लाख मधुमक्खियां खरीदी गई। 10 बॉक्स में रखी मधुमक्खियां को जंगल में रखवा दिया है। एक बॉक्स में 5 से 20 हजार मधुमक्खियां है। ये मधुमक्खियां अपने छत्ते से निकलकर नई कॉलोनी बनाएगी। एक रानी मधुमक्खी 3 हजार अंडे देती हैं। पॉलिनेशन (सीड्स) बनाने में सहयक होती है भटनागर ने बताया- खेत व जंगल में मधुमक्खियां पॉलिनेशन सीड्स बनाने में सहायक होती है। ये परागण कण को एक जगह से दूसरी जगह (मेल का फीमेल व फीमेल का मेल के पास) ले जाती है। उससे सीड्स बनता है। इससे पेड़ पौधे की संख्या व फसल में वृद्धि होती है। यानी किसी पौधे का विस्तार होने के लिए उनमें पॉलिनेशन होना बहुत जरूरी है। ये मधुमक्खी, पतंगे, तितली, भौरें आदि के माध्यम से होता है। शेरगढ़ अभ्यारण में पेड़ पौधे कम होने का एक कारण मधुमक्खियों की संख्या में कमी होना भी सामने आया है। एक छत्ते में 50 हजार मधुमक्खियां व उनके अंडे होते हैं पहले के लोग मधुमक्खी का छत्ता टेक्निक से तोड़ते थे। वो केवल ऊपर ऊपर से शहद निकालते थे। वो रानी मक्खी को नहीं मारते थे। आजकल शहद निकालने के लिए लोग पूरे छत्ते को तोड़ देते है। एक छत्ते में 50 हजार मधुमक्खियां व उनके अंडे होते हैं। छत्ता तोड़ने से सभी मर जाते हैं। हम शेरगढ़ अभ्यारण के अलावा भैंसरोडगढ़ सेंचुरी, अभेडा बायोलॉजिकल पार्क व कोटा जू में भी मधुमक्खियों के बॉक्स लगाने की प्लानिंग कर रहे हैं।
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