डिजिटल सूचनाओं से लैस होकर घातक हुए सेना के हथियार:दक्षिण कमान के सेनापति ने 'अमोघ ज्वाला' युद्धाभ्यास में परखी युद्धक तैयारी
भारतीय सेना की दक्षिण कमान ने अपनी मारक क्षमता और 'फ्यूचर रेडी' (भविष्य के लिए तैयार) होने के संकल्प को चरितार्थ करते हुए 'अभ्यास अमोघ ज्वाला' का सफल आयोजन किया। इस उच्च-स्तरीय सैन्य अभ्यास का निरीक्षण दक्षिण कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ (PVSM, UYSM, AVSM) ने किया। अभ्यास के दौरान रेगिस्तानी और मैदानी इलाकों में सेना की मशीनीकृत टुकड़ियों ने अपनी गति, सटीकता और तकनीक के बेजोड़ संगम से दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। क्या रहा 'अमोघ ज्वाला' का मुख्य आकर्षण? अभ्यास 'अमोघ ज्वाला' केवल हथियारों का प्रदर्शन मात्र नहीं था, बल्कि यह आधुनिक युग के 'नेटवर्क्ड और इंटीग्रेटेड' युद्ध कौशल की एक सजीव प्रयोगशाला रही। अभ्यास के दौरान जो सबसे महत्वपूर्ण बात उभरकर सामने आई, वह थी नई पीढ़ी के उपकरणों का निर्बाध एकीकरण। सेना ने दिखाया कि कैसे पारंपरिक टैंक और इन्फैंट्री अब डिजिटल सूचनाओं से लैस होकर अधिक घातक हो गए हैं। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने इस दौरान सैनिकों और कमांडरों के बीच उस 'कॉम्बैट एज' को देखा, जो एक समन्वित युद्ध प्रणाली से पैदा होती है। इसमें थल सेना के साथ-साथ वायुसेना के तालमेल ने अभ्यास को 'मल्टी-डोमेन' (बहु-आयामी) बना दिया। ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का बोलबाला आधुनिक युद्ध अब केवल गोलियों से नहीं, बल्कि डेटा और सिग्नल से भी लड़े जाते हैं। अभ्यास में इसे प्रमुखता से शामिल किया गया: हमलावर हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों का गर्जन मैदानी कार्रवाई के दौरान आकाश से भी मौत बरस रही थी। अभ्यास में अटैक हेलीकॉप्टर्स और लड़ाकू विमानों को एकीकृत तरीके से शामिल किया गया। टैंकों की आगे बढ़ती टुकड़ियों को हवाई कवर प्रदान किया गया और गहरी मार करने वाली प्रणालियों ने दुश्मन के लॉजिस्टिक सेंटरों को तबाह करने का अभ्यास किया। 'फ्यूचर रेडी' और 'आत्मनिर्भर' भारत की झलक लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अभ्यास के उपरांत संबोधन में कहा कि भारतीय सेना अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक और तकनीक आधारित दृष्टिकोण अपना रही है। उन्होंने 'अमोघ ज्वाला' को भविष्य की चुनौतियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस अभ्यास में स्वदेशी तकनीक और मेक-इन-इंडिया के तहत विकसित कई रक्षा प्रणालियों का भी उपयोग किया गया, जो सेना की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। 'अभ्यास अमोघ ज्वाला' ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय सेना की दक्षिण कमान किसी भी तरह की भौगोलिक चुनौती और आधुनिक खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। तकनीक, तेजी और सटीकता के इस त्रिकोण ने दुश्मन के लिए किसी भी हिमाकत का रास्ता बंद कर दिया है।
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