माचना पुल के गर्डर बदलने से डाउन ट्रैक बंद:60 साल पुराने गर्डर बदलने के लिए दिल्ली-चेन्नई रूट पर 4 घंटे का ब्लॉक

Mar 9, 2026 - 18:21
 0  0
माचना पुल के गर्डर बदलने से डाउन ट्रैक बंद:60 साल पुराने गर्डर बदलने के लिए दिल्ली-चेन्नई रूट पर 4 घंटे का ब्लॉक
नई दिल्ली-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग पर बैतूल रेलवे स्टेशन के पास माचना नदी पुल पर 60 साल पुराने लोहे के गर्डरों को बदलने का काम सोमवार को शुरू हो गया है। इस कार्य के लिए रेलवे ने करीब 4 घंटे का ब्लॉक लिया है, जिसके चलते बैतूल से मलकापुर के बीच डाउन ट्रैक पर रेल यातायात रात करीब 8 बजे तक पूरी तरह बंद कर दिया गया है। फिलहाल मौके पर रेलवे के कई विभागों के इंजीनियर मौजूद हैं और गर्डर बदलने का काम तेजी से जारी है। गर्डर बदलने का काम शुरू होने से पहले इस ट्रैक से शाम 4:07 बजे 58830 छिंदवाड़ा पैसेंजर गुजरी। यह डाउन लाइन से गुजरने वाली आखिरी ट्रेन थी। इसके बाद बैतूल से मलकापुर के बीच डाउन ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही को पूरी तरह से रोक दिया गया है। रेलवे ने मरामझिरी से बरसाली स्टेशनों के बीच ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) लाइन की बिजली आपूर्ति भी इस ब्लॉक के दौरान बंद रखी है। त्रिकुल एक्सप्रेस मरामझिरी में रुकेगी रेलवे प्रबंधन के अनुसार, शाम करीब 7:20 बजे मरामझिरी स्टेशन पहुंचने वाली त्रिकुल एक्सप्रेस को वहीं पर रोक कर रखा जाएगा। इसके अलावा एक अन्य यात्री ट्रेन को भी कुछ समय के लिए रोकने की व्यवस्था की गई है। शाम 7:30 बजे गुजरने वाली यह ट्रेन ब्लॉक के कारण देरी से चल सकती है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अप ट्रैक से गुजरने वाली ट्रेनों को भी इस हिस्से में एहतियातन 25 किलोमीटर प्रति घंटे की धीमी रफ्तार से निकाला जा रहा है। कई शाखाओं के इंजीनियर मौके पर, 4 घंटे का लिया गया है ब्लॉक रेलवे ने माचना नदी पुल पर गर्डर बदलने के इस महत्वपूर्ण काम के लिए लगभग 4 घंटे का मेगा ब्लॉक लिया है। मौके पर रेलवे के लोक निर्माण (PWD), इलेक्ट्रिकल और सिग्नल कोर सहित कई शाखाओं के इंजीनियर मौजूद रहकर कार्य करवा रहे हैं। 1966 में लगे थे पुराने गर्डर, लंबे समय से थी बदलने की जरूरत बैतूल में मुख्य रेल यातायात निरीक्षक रहे अशोक कटारे ने बताया कि माचना नदी पुल के ये गर्डर लगभग 60 साल पुराने हैं। उन्होंने बताया कि, इन्हें वर्ष 1966 में लगाया गया था और उसी समय इस रूट पर डाउन ट्रैक भी शुरू किया गया था। लंबे समय से इन्हें बदलने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। कटारे के अनुसार नए गर्डर कई साल पहले ही बनकर तैयार थे, लेकिन रेलवे ट्रैफिक अधिक होने के कारण इन्हें लगाने का समय नहीं मिल पा रहा था। गर्डर बदलने के बाद ट्रेनों का सफर होगा ज्यादा सुरक्षित लंबे इंतजार के बाद अब सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इन पुराने गर्डरों को नए गर्डरों से बदला जा रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह काम पूरा होने के बाद माचना नदी पुल से ट्रेनों की आवाजाही भविष्य में और अधिक सुरक्षित हो जाएगी।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0