विधायक का नाम आमंत्रण पत्र से गायब:पलारी कॉलेज में संदीप साहू ने प्राचार्य को भेंट की रामचरितमानस और संविधान
पलारी नगर स्थित शासकीय दाऊ बृजलाल महाविद्यालय में आयोजित वार्षिकोत्सव और प्रतिभा सम्मान समारोह के आमंत्रण पत्र से कसडोल विधानसभा क्षेत्र के विधायक संदीप साहू का नाम गायब मिला। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे। आमंत्रण पत्र में भाजपा के कई छोटे नेताओं के नाम शामिल थे, लेकिन करीब चार लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस विधायक संदीप साहू का नाम नहीं था। मामले की जानकारी मिलने पर विधायक साहू ने इसे केवल व्यक्तिगत उपेक्षा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता का अपमान बताया। बताया गया कि उस समय विधायक विधानसभा सत्र में मौजूद थे। आमंत्रण पत्र की प्रति संज्ञान में आते ही उन्होंने सदन की कार्यवाही छोड़ पलारी रवाना होने का निर्णय लिया। वे समर्थकों के साथ बाइक रैली के रूप में सीधे महाविद्यालय परिसर पहुंचे। छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कॉलेज पहुंचकर विधायक संदीप साहू ने सबसे पहले छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पूजा-अर्चना की। समर्थकों की भीड़ मौजूद रही, फिर भी माहौल नियंत्रित रखा गया ताकि छात्रों के कार्यक्रम में बाधा न आए। गुलाब और किताब भेंट कर दर्ज कराया विरोध आमतौर पर ऐसे मामलों में नारेबाजी या हंगामा होता है, लेकिन विधायक साहू ने विरोध का शालीन तरीका अपनाया। छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों की उपस्थिति में उन्होंने प्राचार्य डॉ. एके उपाध्याय को गुलाब का फूल भेंट किया। साथ ही रामचरितमानस और भारतीय संविधान की प्रति भी दी। उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि कसडोल विधानसभा की चार लाख जनता का अपमान है। पिछले वर्ष भी ऐसी घटना हुई थी। तब पत्र लिखकर प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई थी, फिर भी इस वर्ष वही गलती दोहराई गई। “शिक्षा का मंदिर है, राजनीति का अखाड़ा नहीं” विधायक ने कहा, “हम यहां बच्चों के कार्यक्रम में बाधा डालने नहीं आए हैं। यह शिक्षा का मंदिर है, राजनीति का अखाड़ा नहीं। इसलिए गुलाब और किताबें भेंट की गई हैं, ताकि सद्बुद्धि से प्रोटोकॉल का पालन हो और भविष्य में ऐसी भूल न हो।” सुनियोजित उपेक्षा का आरोप विधायक प्रतिनिधि और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष पिंटू वर्मा ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार प्राचार्य से विधायक का नाम अतिथि सूची में जोड़ने का अनुरोध किया था, लेकिन अनसुना कर दिया गया। उनके अनुसार यह सुनियोजित अपमान है और पहले भी ऐसा हो चुका है। प्राचार्य ने जनभागीदारी समिति पर डाली जिम्मेदारी प्राचार्य डॉ. एके उपाध्याय ने कहा कि कार्यक्रम जनभागीदारी समिति के तत्वावधान में आयोजित हुआ था। अतिथियों का चयन और आमंत्रण पत्र समिति ने जारी किए। किसी को अपमानित करने का इरादा नहीं था। हालांकि जनभागीदारी समिति के सचिव स्वयं प्राचार्य होते हैं, ऐसे में राजनीतिक हलकों में उनके बयान को जिम्मेदारी से बचने की कोशिश माना जा रहा है। मंत्री और पूर्व अध्यक्ष का कार्यक्रम निरस्त विधायक के विरोध का असर कार्यक्रम पर पड़ा। प्रभारी मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल कार्यक्रम में शामिल होने नहीं पहुंचे। जिला पंचायत सदस्य रवि बंजारे ने कहा, “जिसने अपमान किया, उसे गुलाब दिया। यह विधायक की महानता है।”
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