भिंड में 86 लाख का 'सौभाग्य' घोटाला:मंत्री के इशारे पर ग्वालियर के ठेकेदार को मिला ठेका, 90 हजार घरों में बगैर मीटर बिल वसूली
भिंड जिले में सौभाग्य योजना के नाम पर 86 लाख रुपए का घोटाला सामने आया है। आरोप है कि एक मंत्री के इशारे पर ग्वालियर के एक ठेकेदार को ठेका दिया गया। उसने बिजली कंपनी के अधिकारियों से सांठगांठ कर कागजों में मीटर लगने का काम पूरा दिखाकर करीब 86 लाख रुपए का भुगतान हासिल कर लिया। अब भी करीब 90 हजार उपभोक्ताओं से बिना मीटर के ही अनुमानित बिल वसूले जा रहे हैं, जिससे योजना की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जमीनी सच्चाई जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम अटेर क्षेत्र के कई गांवों में पहुंची। टीम ने उपभोक्ताओं से बातचीत की और उन स्थानों तक भी पहुंची, जहां सौभाग्य योजना के बिजली मीटर ठेकेदार द्वारा छिपाकर रखे गए थे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… कागजों में वेरिफिकेशन, जमीन पर मीटर नदारद चंबल के बीहड़ क्षेत्र में स्थित बौरेश्वर, दुल्हागन, कमई, अहरौली घाट, चौम्हो, कदौरा, जौरी, सुरपुरा, प्रतापतपुरा, जम्हौरा और कल्याणपुरा सहित करीब 22 गांव ऐसे हैं, जहां वर्ष 2018 से 2025 के बीच सौभाग्य योजना के तहत बिजली लाइन और मीटर लगाए जाने थे। ये सभी गांव भिंड जिले के अटेर क्षेत्र में आते हैं। इन गांवों में बिजली सप्लाई लाइन बिछाने और मीटर लगाने के लिए ग्वालियर की यश उपाध्याय फर्म को करीब 86 लाख रुपए का टेंडर दिया गया था। आरोप है कि फर्म के कर्ता-धर्ताओं ने बिजली कंपनी के अधिकारियों से सांठगांठ कर बिना मीटर लगाए ही बिल पास करा लिए। कागजों में काम पूरा दिखाकर सरकारी राशि का लाखों रुपए का भुगतान हासिल कर लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर मीटर अब तक नदारद हैं। रिकॉर्ड में दिखा दिया फिजिकल वेरिफिकेशन सूत्रों के मुताबिक, इस गड़बड़ी की जानकारी उस समय के संबंधित अधिकारियों को भी थी। इसके बावजूद उन्होंने जमीनी जांच किए बिना कागजों में ही फिजिकल वेरिफिकेशन पूरा दिखा दिया। इसके बाद ठेकेदार ने अपनी ऊंची पहुंच का फायदा उठाते हुए भुगतान हासिल कर लिया। इसका नतीजा यह हुआ कि जिन गांवों में आज तक बिजली मीटर नहीं लगे हैं, वहां उपभोक्ताओं को मनमाने और अनुमानित बिल भरने पड़ रहे हैं। इससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है और पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। भास्कर टीम पहुंची मीटर छिपाने के गोदाम तक मामले की जानकारी मिलने के बाद दैनिक भास्कर की टीम ने गहराई से पड़ताल शुरू की। टीम अटेर क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में पहुंची और ग्रामीणों से बातचीत की। इसी दौरान एक व्यक्ति सामने आया, जिसे पूरे सिस्टम की अंदरूनी जानकारी थी। उसने शर्त रखी कि वह उस स्थान तक ले जाएगा, जहां बिजली ठेकेदार ने सौभाग्य योजना के मीटर छिपाकर रखे हैं, लेकिन जगह का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। टीम के आश्वासन के बाद वह व्यक्ति भास्कर टीम को एक गोदाम तक ले गया। मौके पर देखा गया कि एक बंद और अंधेरे कमरे में बड़ी संख्या में बिजली मीटर छिपाकर रखे गए थे। सभी मीटर नए थे। उनकी पैकिंग भी जस की तस थी। टीम ने पूरे कमरे का वीडियो रिकॉर्ड किया। घोटाले की परतें खुलने पर सामने आया कि ग्वालियर का ठेकेदार यश उपाध्याय भिंड जिले में सौभाग्य योजना के तहत मीटर लगाने का टेंडर हासिल कर चुका था। बिजली कंपनी से जुड़े लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ठेकेदार ने एक मंत्री से नजदीकी का फायदा उठाया। मंत्री के इशारे पर ठेका मिला। उनके दबाव में अधिकारियों ने फर्जी बिलों को मंजूरी दी। वरिष्ठ से लेकर कनिष्ठ अधिकारियों तक पर दबाव बनाया गया, जिससे बिना काम कराए ही भुगतान होता रहा और मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को 86 लाख रुपए से अधिक की चपत लगी। 90 हजार घरों में नहीं लगे मीटर बिजली कंपनी के एक अधिकारी ने बातचीत में इस पूरे मामले को बड़ा घोटाला बताया। अधिकारी के मुताबिक, सौभाग्य योजना के तहत करीब 90 हजार घरों में बिजली मीटर नहीं लगाए गए, जबकि कागजों में मीटर लगना दर्शा दिया गया है। स्थिति यह है कि इन घरों में आज भी बिजली खपत का आकलन अनुमान के आधार पर किया जा रहा है, यानी उपभोक्ताओं से फ्लैट बिलिंग के जरिए वसूली हो रही है, जिसका सीधा आर्थिक नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है। यह मामला न केवल सौभाग्य योजना की साख पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि कैसे ठेकेदार, अधिकारी और सियासी संरक्षण के सहारे सरकारी योजनाओं को कागजों में पूरा दिखाकर करोड़ों का खेल खेला जा रहा है। उपमहाप्रबंधक बोले- यह जांच का विषय है ठेकेदार यश उपाध्याय से कई बार संपर्क किया गया। पहली बार फोन उठाया, सवाल पूछते ही कॉल काट दिया। इसके बाद न फोन उठाया गया और न ही वॉट्सएप संदेशों का कोई जवाब मिला। इस पूरे मामले में बिजली कंपनी के महाप्रबंधक उप महाप्रबंधक विशाल उपाध्याय का कहना है कि अटेर क्षेत्र में सौभाग्य योजना में बिजली मीटर लगाए जाने की योजना आई थी, परंतु आज भी कई गांव ऐसे हैं, जिनमें बिजली मीटर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मीटर क्यों नहीं लगाए गए। ये जांच का विषय है। इस बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं बोल पाऊंगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0