30 साल की लीज तो बन सकेंगे जमीन के मालिक:लीज लैंड को फ्रीहोल्ड कराना पड़ेगा महंगा, जानिए एमपी में क्या बदल रहे नियम

Apr 9, 2026 - 10:04
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30 साल की लीज तो बन सकेंगे जमीन के मालिक:लीज लैंड को फ्रीहोल्ड कराना पड़ेगा महंगा, जानिए एमपी में क्या बदल रहे नियम
राज्य सरकार नगरीय क्षेत्रों में लीज जमीन के रिन्युअल और फ्रीहोल्ड नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके लिए नगर पालिका अचल संपत्ति अंतरण कानून 2016 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक 30 साल या उससे ज्यादा की लीज पर जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा, लेकिन शुल्क बढ़ाया जा रहा है। रिन्युअल के लिए प्रीमियम और किराए का नया निर्धारण होगा। कम्पाउंडिंग फीस और पैनाल्टी बढ़ाई जाएगी। लीज जमीन के व्यवसायिक उपयोग पर शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में नगरीय निकायों की ज्यादातर जमीन लीज पर निजी हाथों में है। वर्तमान में बड़ी संख्या में लीज रिन्युअल और फ्रीहोल्ड के केस लंबित हैं। सरकार इनके निपटारे के लिए नियमों में बदलाव की तैयारी में है। प्रस्ताव जल्द कैबिनेट में भेजा जाएगा। नियमों में बदलाव और आम लोगों पर असर जानिए इस रिपोर्ट में… 10 प्रस्तावित बदलाव जो आम लोगों पर असर डालेंगे 1. तीस साल का पट्टा तो जमीन होगी फ्री होल्ड नगरीय निकाय की जमीन जो लीज पर दी गई है और जिसका रेसीडेंशियल और कमर्शियल इस्तेमाल हो रहा है, उसे फ्री होल्ड किया जा सकता है। पुराने नियम में समय या अवधि की साफ शर्त नहीं थी। अब प्रस्तावित नियम में 3 अहम शर्तें जोड़ दी गई हैं। 2. फ्रीहोल्ड कराने में ज्यादा पैसा लगेगा मौजूदा नियम के मुताबिक रेसीडेंशियल प्रॉपर्टी को फ्रीहोल्ड कराने के लिए बाजार मूल्य का 1% और कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए 2% का भुगतान करना होता है। प्रस्तावित नियम के मुताबिक अब रेसीडेंशियल प्रॉपर्टी के लिए ढाई गुना बढ़ोतरी करते हुए 2.5 फीसदी और कमर्शियल के लिए ढाई गुना से ज्यादा बढ़ोतरी करते हुए 5 फीसदी किया गया है। 3. लीज रेंट जमा करने के नियम में भी बदलाव मौजूदा नियम के मुताबिक लीज रेंट की शर्त है कि शेष अवधि या 10 साल, जो भी इनमें से कम हो। लीज धारक को भुगतान करना होगा। अब प्रस्तावित नियम कहता है कि शेष अवधि या 10 साल, जो भी अधिक हो। इस हिसाब से भुगतान करना होगा। इसका मतलब है कि पहले कम अवधि का पैसा देना पड़ता था अब ज्यादा अवधि का पैसा देना पड़ेगा। इसे ऐसे समझिए…. मान लीजिए किसी की लीज में 6 साल बाकी है। अब मौजूदा नियम के मुताबिक ये 10 साल से कम है तो 6 साल की अवधि का किराया लिया जाएगा। प्रस्तावित नियम के मुताबिक अब ज्यादा अवधि का किराया देना पड़ेगा तो लीज होल्डर को 10 साल का किराया देना होगा यानी 4 साल का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 4. रजिस्ट्री के 15 दिन के बाद मिलेगा सर्टिफिकेट फ्री होल्ड के लिए कन्वर्जन चार्ज के नियम और प्रक्रिया तय की गई है। आवेदन के 30 दिन के भीतर कन्वर्जन चार्ज जमा करना होगा। भुगतान के बाद ही कन्वर्जन डीड( हस्तांतरण दस्तावेज) बनेगा। इसके बाद रजिस्ट्री होगी जिसका खर्च पट्टाधारी को देना पड़ेगा। रजिस्ट्री के 15 दिन के अंदर फ्रीहोल्ड प्रमाण पत्र मिलेगा। इसमें अहम बात ये है कि ये सभी चार्ज न्यूनतम है, लेकिन नगरीय निकाय चाहे तो इससे ज्यादा वसूल कर सकते हैं। 5. लीज रेंट की अवधि 30 साल की बजाय 25 साल 6. लीज की प्रॉपर्टी का किराया होगा महंगा 7. निकायों को किराया बढ़ाने का अधिकार नया नियम कहता है कि ये दरें न्यूनतम हैं। नगर निगम और स्थानीय निकाय चाहें तो इससे ज्यादा भी वसूल सकते हैं। आगे चलकर किराया और भी बढ़ सकता है। लीज रेंट के प्रस्तावित नियम में कम किराया की अवधि 10 साल से घटाकर 5 साल कर दी गई है। वहीं कम किराए वाली शर्त हटाकर ज्यादा किराए वाली शर्त लागू की है। कुल मिलाकर यह नया नियम आम लोगों के लिए ज्यादा महंगा पड़ेगा। 8. निर्माण में देरी पर 10 गुना जुर्माना यदि पट्टाधारी या लीज होल्डर समय पर निर्माण नहीं करता और देरी करता है, लेकिन केस चलने के दौरान ही निर्माण पूरा कर देता है तो इसके लिए मौजूदा नियम को और ज्यादा सख्त किया गया है। इसे ऐसे समझिए…. यदि किसी प्रॉपर्टी का बाजार मूल्य 20 लाख रुपए है। पुराने नियम के मुताबिक 0.05% की दर से जुर्माना 1,000 रुपए हुआ। प्रस्तावित नियम के मुताबिक 0.5% की दर से ये जुर्माना दस हजार रुपए होगा। 9. लैंड यूज बदलने के लिए ज्यादा पैसा देना होगा यदि मास्टर प्लान बदलने के बाद कोई पट्टा रिन्यू के साथ लैंड यूज बदलना चाहता है, तो बाजार मूल्य का 11% तक भुगतान करना होगा। यह तीन मद में लिया जाएगा… 10. लीज रेंट और जुर्माना हर साल बढ़ेगा मौजूदा नियम में लीज रेंट और जुर्माना न्यूनतम दरों पर लिया जाता है, और निकाय ज्यादा वसूल सकते हैं। यह पहले भी था। अब प्रस्तावित नियम में हर साल बढ़ोतरी जरूरी कर दी गई है। प्रस्तावित नियम के मुताबिक हर साल कम से कम 10% किराया बढ़ाना होगा। हर 5 साल में 5% अतिरिक्त बढ़ोतरी भी जरूरी होगी। असर: पहले किराया स्थिर रह सकता था, लेकिन अब हर साल 10% बढ़ेगा और 5 साल में 5% अतिरिक्त बढ़ेगा। सरकार के तीन आदेश, फिर भी फ्रीहोल्ड नहीं हो रही प्रॉपर्टी

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