गोमूत्र की ताकत से कमाल:जैविक खेती करके एक एकड़ में 26 क्विंटल तक धान का उत्पादन
(छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील किसान) डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम बगदई के किसान तोरनदास साहू रासायनिक की जगह जैविक खेती अपनाकर एक एकड़ में 26 क्विंटल तक धान का उत्पादन कर रहे हैं। गोमूत्र के गुण और शक्ति को पहचान कर 2015 से जैविक खेती को अपनाया और धान, सब्जी उत्पादन में उपलब्धि हासिल की। उन्हें दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में फार्मर ऑफ द ईयर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम बगदई के रहने वाले 10वीं पास किसान तोरनदास वर्ष 2015 से अपनी 3 एकड़ 70 डिसमिल भूमि पर लगातार जैविक खेती कर रहे हैं। तोरनदास जैविक विविधता को अपनाने, पर्यावरण की सुरक्षा, खेत की मेड़ों पर पेड़ पौधे लगाने, जहर मुक्त अनाज एवं सब्जी उत्पादन करने के लिए जाने जाते हैं। तोरनदास साल 2006 से खरीफ और रबी सीजन में धान के साथ चना, मसूर, आलू, पत्तेदार सब्जियों की खेती कर रहे हैं। घर में बंधी गायों के गोबर की खाद और गोमूत्र से बाड़ी में लगी सब्जियों का बेहतर उत्पादन देख आइडिया मिला। उन्होंने खेतों में लगे धान और सब्जियों में इसे आजमाया। पहले एक दो साल सामान्य उत्पादन रहा, लेकिन बाद में उत्पादन बढ़ता चला गया। किसान अपनी खेती के वीडियो यू-ट्यूब पर अपलोड करते हैं। उनकी सब्जियां, टमाटर, कद्दू, आलू, गंवार फ्ल्ली प्रदेश और दूसरे राज्यों तक जाती है। ऐसे बनता है कीटनाशी ब्रह्मास्त्र किसान तोरनदास बताते हैं कि जैविक कीटनाशी ब्रह्मास्त्र बनाने नीम की 3 किलो पत्ती, 2 किलो करंज, सीताफल, धतूरे की पत्तियों और 10 लीटर गोमूत्र मिश्रण को 30 मिनट उबाल कर ब्रम्हास्त्र बनाते हैं। नीमास्त्र बनाने 5 किलो कुटी हुई नीम की पत्ती और फल, 5 लीटर गोमूत्र, 1 किलो गोबर के मिश्रण को ढंक कर रखते हैं और 48 घंटे बाद इस कीटनाशक का शाम को खेतों में छिड़काव करते हैं। जीवामृत बनाने ड्रम में 200 लीटर पानी में 10 किलो गोबर और 10 लीटर गोमूत्र, घोल में 2 किलो बेसन मिश्रित कर छांव में 86 घंटों के लिए रखा जाता है। अग्नि अस्त्र बनाने गोमूत्र, नीम की पत्ती, हरी मिर्च, लहसुन, तंबाकू के मिश्रण को उबाल कर, छांव में ठंडा कर इसका उपयोग किया जाता है। प्रति एकड़ 15-20 हजार का खर्च किसान अपनी फसल के लिए स्वयं का तैयार किया बीज, जैविक खाद, कीट और बीमारी को नियंत्रित करने पेस्टिसाइड और दवा बनाते हैं। रसायनिक खेती में मिट्टी प्रबंधन, जोताई, बोनी, बीमारी, कीट नियंत्रण प्रति एकड़ 20 हजार वहीं जैविक में 15 हजार खर्च आता है। डीएपी, यूरिया खरीदनी नहीं पड़ती। बचत से लागत में कम लाभ ज्यादा होता है। खरपतवार में रासायनिक कीटनाशी का उपयोग नहीं करते। बिजामृत से बीज उपचार, जीवामृत से मृदा सुधार, नीम अस्त्र एवं ब्रह्मास्त्र से कीट नियंत्रण, गोबर एवं गोमूत्र से जैविक खेती की विधि से फसल उत्पादन करते हैं। बेहतर जोताई से 5 हजार तक बचत तोरन साहू को देख उन्हीं के गांव के कमल साहू और श्यामलाल साहू अपनी 3 एकड़ भूमि में जैविक खेती अपनाकर कम लागत में बेहतर उत्पादन से ज्यादा लाभ कमा रहे हैं। तोरन ने स्वयं के जुगाड़ से मिट्टी सुधार करने लोहे और लकड़ी से दतारी नामक कृषि यंत्र बनाया इससे ट्रैक्टर से बेहतर जोताई कर 5 हजार तक बचत करते हैं। पक्षी और चूहों को दूर रखने एक यंत्र बनाया जिसमें हवा से उड़ती है इससे कनेक्ट घंटी बजने से पक्षी और चूहे फसलों से दूर रहते हैं। साल 2023-24 में उन्होंने 200 कृषि सखियों को अपने गांव में जैविक खेती करने का प्रशिक्षण भी दिया है। ----------- इन प्रगतिशील किसान से और जानें
7999521625, 8889193421
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