बाइपास निर्माण से पेंड्रानगर में बढ़ी यातायात समस्या:स्थानीय लोग बोले- 15 से 20 मिनट तक लंबा जाम लगता है, आपात सेवाएं भी प्रभावित
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रानगर में प्रस्तावित बाईपास मार्ग का निर्माण कार्य सालों से लंबित है। इसके कारण आम नागरिकों को गंभीर यातायात समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। नगर के मुख्य मार्गों पर लगातार जाम लगने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। पेंड्रा नगर जिले का एक प्रमुख केंद्र है, जहां से चारों दिशाओं में वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में बाइपास का निर्माण अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है, लेकिन यह परियोजना पिछले 8 से 9 सालों से शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, बाइपास के अभाव में दुर्गा चौक और बस स्टैंड क्षेत्र में दिनभर भारी यातायात दबाव रहता है। अक्सर 15 से 20 मिनट तक लंबा जाम लग जाता है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी दिक्कतें आती हैं। कई बार जाम के कारण अप्रिय घटनाएं भी सामने आई हैं। लोगों को हो रही भारी परेशानी लोगों का कहना है कि जाम की समस्या के कारण ट्रेन पकड़ने, आवश्यक कार्यों के लिए बाहर जाने और दैनिक आवागमन में बड़ी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। इससे लोगों को आर्थिक और मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। पेंड्रा परिक्षेत्र से जुड़े 30 से 35 किलोमीटर के आसपास के गांवों के नागरिक भी इस समस्या से प्रभावित हैं। जल्द काम शुरू करने की मांग क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि पेंड्रा नगर के जनहित से जुड़े अन्य मुद्दों की तरह बाईपास निर्माण को भी लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। नागरिकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस लंबित परियोजना पर तत्काल संज्ञान लिया जाए और बाईपास निर्माण कार्य को शीघ्र प्रारंभ कराया जाए, ताकि नगरवासियों को जाम और अव्यवस्थित यातायात से राहत मिल सके। मासुलडांड़ में 25 साल से लो वोल्टेज वहीं, जीपीएम जिले के रूमगा गांव का आश्रित मोहल्ला मासुलडांड़ पिछले 25 सालों से कम वोल्टेज की समस्या से जूझ रहा है। यहां बिजली के खंभे और तार तो हैं, लेकिन घरों में रोशनी के नाम पर बल्ब जुगनू की तरह टिमटिमाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि 25 साल पहले जब पहली बार बिजली के खंभे लगाए गए थे, तो उन्हें उम्मीद जगी थी। हालांकि, तब से लेकर अब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। शाम होते ही मासुलडाँड़ के लगभग 50 परिवारों का जीवन प्रभावित हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं के खाना बनाने में परेशानी होती है। कम वोल्टेज से अंधेरे में जीवन, लालटेन-चिमनी का सहारा यहां के लोग लालटेन और चिमनी का उपयोग करने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि कम वोल्टेज के बावजूद बिजली का बिल पूरा आता है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष है। समस्या का मुख्य कारण 50 घरों और दो गांवों के लिए मात्र 25 केवी का एक छोटा ट्रांसफार्मर है, जो बिजली के लोड को संभालने में पूरी तरह अक्षम है। शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं जनपद सदस्य किशमिश भानू ने बताया कि ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों में शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। ग्रामीण प्रशासन से जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी हल निकालने की मांग कर रहे हैं।
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